May 02, 2020

#Ramayan: कैसे हुआ था सीता का जन्म?

ज बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है, पौराणिक ग्रंथों के अनुसार आज के दिन सीता की उत्पत्ति हुई थी।

आज कही पढ़ा 'धार्मिक मान्यता है कि इस दिन प्रभु श्रीराम और माता जानकी को विधि-विधान पूर्वक पूजा आराधना करने से व्रती को अमोघ फल की प्राप्ति होती है साथ ही व्रती को मनोवांछित फलों की भी प्राप्ति होती है'। 

थोड़ा हास्यास्पद लगा, जन्मदिन सीता का और पूजा राम के साथ? बताये ज़रा क्या ऐसी कोई धार्मिक मान्यता है जो कहती हो राम नवमी के दिन राम-सीता की पूजा या फिर जन्माष्टमी के दिन कृष्णा के साथ राधा की आराधना करना चाहिए? खैर जाने दीजिये, पुरुष प्रधान समाज में ऐसा मुमकिन कहा?

कभी समय मिले तो वाल्मीकि रामायण पढ़ियेगा, पुरुष प्रधानता की अनेक मिसाल मिल जायेगी।

शायद इसीलिए वाल्मीकि जी ने सर्ग ६६(छियासठ) में सिर्फ दो श्लोको (१३-१४) में सीता की उत्पत्ति के बारे में संक्षेप में वर्णन किया है, हलाकि राम जन्म विस्तार में बताया गया है।

धरती की पुत्री

अथ मे कृषतः क्षेत्रं लाङ्गलादुत्थिता ततः । 
क्षेत्रं शोधयता लब्धा नाम्ना सीतेति विश्रुता ॥13॥

भूतलादुत्थिता सा तु व्यवर्द्धत ममात्मजा । 
वीर्य्यशुल्केति मे कन्या स्थापितेयमयोनिजा ॥14॥

वाल्मीकि रामायण में राजा जनक कहते है एक समय यज्ञ करने के लिए मैँ हल से खेत जोत रहा था। उस समय हल की नोक से एक कन्या भूमि से निकली। भूमि से उत्पन्न ये कन्या मेरी आत्मजा, मेरी बेटी कहलाती है। मैंने ये शर्त रखी है की इसका विवाह पुरुष के कौशल का पूर्ण विश्लेषण करने के बाद ही करुँगा ।

मेनका का वरदान 

वाल्मीकि रामायण के सीता जन्म से मिलती जुलती बात कंबन द्वारा 12वीं सदी में तमिल भाषा में रचित रामायण में भी है, मैंने पढ़ा तो नहीं पर सुना है इस कथानक को उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी भारत के संस्करणों में और विस्तार दिया गया है।

11वीं सदी में क्षेमेंद्र द्वारा रचित 'रामायणमंजरी’में मेनका का वर्णन आता है, ऐसा ही कुछ उपेंद्र भंज की 17वीं सदी की उड़िया रचना ‘बैदेहीशबिलास’में भी है।  क्षेमेंद्र कहते है, अप्सरा मेनका राजा जनक को आकाश में दिखती हैं और वे मेनका से एक बच्चे की इच्छा व्यक्त करते हैं। उसके बाद राजा जनक ज़मीन पर एक शिशु को पाते हैं। क्षेमेंद्र की रचना में सीता को मेनका की बेटी बताया गया है, उपेंद्र भंज सीता को मेनका की बेटी न कहके एक वरदान बताते है।

रावण की शापित बेटी 

मैंने सुना है दक्षिण भारत के जैन रामायणों ने संभवतः पहली बार सीता को रावण-मंदोदरी के बेटी बताया है। जब हनुमान समुद्र लांग कर लंका गए थे, तब वे मंदोदरी को एक पल के लिए सीता समझ बैठे थे, शायद इसी कथानक के आधार पर ये कहानी जोड़ी गई हो। वैसे हनुमान से सीता को पहले देखा था क्या? अगर नहीं तो वे मंदोदरी को सीता कैसे समझ बैठे?

609 ईस्वी में संघदास द्वारा रचित रामायण में एक कथनांक आता है जिसमे मंदोदरी के शरीर पर एक अशुभ संकेत उभरता है, जो इस बात की भविष्यवाणी थी के मंदोदरी का पहला बच्चा रावण के परिवार के अंत का कारण बनेगा। इसीलिए नवजात शिशु को आभूषण के एक बक्से में रखकर समुद्र में बहा दिया जाता है, जो कि आगे चलकर जनक को मिलता है।

खोतानी रामायण जो 9वीं सदी में लिखी गयी थी, उसमे मंदोदरी के शरीर पर अशुभ संकेत का उल्लेख नहीं है। खोतानी रामायण में बताया है ज्योतिषी भविष्यवाणी करते हैं कि वह मंदोदरी की पहली संतान परिवार की बर्बादी का कारण बनेगी।

787 और 848 ईस्वी के मध्य लिखी गयी तिब्बती भाषा की रामायण में भी नवजात शिशु को एक बक्से में रख कर समुद्र में बहा देने का वर्णन है।

एक और रामायण है 'हिकायत सेरीराम' जो 13वीं और 17वीं शताब्दी के बीच मलय भाषा में लिखी गयी थी। हिकायत सेरीराम में बताया गया है दशरथ की एक पत्नी मंदोदरी थी जिसपर रावण मोहित था। रावण के डर से मंदोदरी अपना प्रतिरूप बनाती है जो सीता को जन्म देती है। ये कहानी ज़रा अधूरी सी लगती है, अगर कभी  'हिकायत सेरीराम' पढ़ने का मौका मिला तो आपको भी पूरी कहानी बताउगा।

'दशावतारचरित' नाम की एक और रामायण है जिसमे बताया गया है एक कमल से सीता का जन्म होता है और वो रावण को मिलती हैः। रावण कमल से निकली लड़की को मंदोदरी के पास लेकर जाता है उसके बाद वे सीता को गोद ले लेते है। नारद मुनि मंदोदरी को बताते है, जब ये लड़की बड़ी होगी तो रावण इस पर मोहित हो जाएगा। डरके मंदोदरी उस बच्ची को एक बक्से में रखकर समुद्र में बहा देती है।

वैसे दक्षिण भारतीय मौखिक परंपराओं के अनुसार रावण एक बार आम खाकर गर्भवती हो जाता है और छींक के माध्यम से सीता को जन्म देता है।

'अद्भुत रामायण' का नाम सुना है? नाम की तरह बड़े अद्भुत कथानांक है इसमें। अद्भुत रामायण के अनुसार मंदोदरी एक ऋषि का विषाक्त खून पे लेने के बाद सीता को जन्म देती है।

सीता के जन्म की कहानिया अनेक है, पर हर रामायण में सीता का दर्द एक है। हर रामायण में सीता ने ही दी है अग्निपरीक्षा, हर रामायण में धोबी का एक सा शक है जो गर्भवती सीता को एक बार फिर वनवास दिलाता है, हर रामायण में सच्चाई का सबूत देकर थक चुकी 'भूमिजा' अंत में समां जाती है भूमि में।

-K Himaanshu Shuklaa..

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