रामानंद सागर की रामायण में शबरी के राम मिलान वाला एपिसोड Youtube पे देख रहा था। रामानंद जी ने रामकथा बहुत साफ़, सहज, और दिल छू लेने वाले भाव से बनायी है, पर शबरी वाला एपिसोड थोड़ा थोड़ा आँखों में चुबता है।
शबरी कहती है "हे राम मुझे नीच कुल में उत्त्पन ये शरीर छोड़ने की आज्ञा देने से पहले मुझे भक्ति का ज्ञान प्रदान करो प्रभु।" उसके बाद राम शबरी को नवदा भक्ति के बारे में बताते है।
रामानंद की रामायण के मखमली क़ालीन जैसी लगती है। शबरी का बार बार खुद को 'नीच' कहने वाले संवाद इस मखमली क़ालीन पर टाट के पैबंद जैसे लगते है।
शबरी कहती है "हे राम मुझे नीच कुल में उत्त्पन ये शरीर छोड़ने की आज्ञा देने से पहले मुझे भक्ति का ज्ञान प्रदान करो प्रभु।" उसके बाद राम शबरी को नवदा भक्ति के बारे में बताते है।
रामानंद की रामायण के मखमली क़ालीन जैसी लगती है। शबरी का बार बार खुद को 'नीच' कहने वाले संवाद इस मखमली क़ालीन पर टाट के पैबंद जैसे लगते है।

